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अंगारक योग से बचने के सटीक उपाय

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विश्व प्रसिद्ध वास्तु ज्योतिष एवं तंत्र गुरु मनीष साई जी के अनुसार आप जानते हैं आपका क्रोधी स्वभाव  कहीं कुंडली में  बने  मंगल  एवं राहु  तथा मंगल एवं केतु के कारण तो नहीं क्योंकि मंगल के साथ यदि राहु केतु होते हैं तो अंगारक योग बनता है। कुंडली में मंगल का राहु अथवा केतु में से किसी के साथ स्थान अथवा दृष्टि से संबंध स्थापित हो जाए तो ऐसी कुंडली में अंगारक योग का निर्माण हो जाता है जिसके कारण जातक का स्वभाव आक्रामक, हिंसक तथा नकारात्मक हो जाता है तथा इस योग के प्रभाव में आने वाले जातकों के अपने भाईयों, मित्रों तथा अन्य रिश्तेदारों के साथ संबंध भी खराब हो जाते हैं। गुरू देव मनीष साईं जी के अनुसार किसी कुंडली में अंगारक योग बन जाने पर ऐसा जातक अपराधी बन जाता है तथा उसे अपने अवैध कार्यों के चलते लंबे समय तक जेल अथवा कारावास में भी रहना पड़ सकता है। किन्तु यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि वास्तविकता में किसी जातक को अंगारक योग के साथ जोड़े जाने वाले अशुभ फल तभी प्राप्त होते हैं जब कुंडली में अंगारक योग बनाने वाले मंगल, तथा राहु अथवा केतु दोनों ही अशुभ हों...

चंद्र -मंगल की युति बनाती है मालामाल, अशुभ होने पर देती है बुरे परिणाम -मनीष साईं

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चंद्र -मंगल की युति बनाती है मालामाल, अशुभ होने पर  देती है बुरे परिणाम -मनीष साईं *शुभ अशुभ स्थिति का पूर्ण विश्लेषण तथा सटीक उपाय के लिए लेख अवश्य पढ़ें। हर ग्रह का कुंडली में महत्व होता है,लेकिन कुछ ग्रह ऐसे हैं जिनका प्रभाव बहुत अच्छा होता है तो कई बार ग्रहों की चाल में  असंतुलन होने से बुरा प्रभाव भी पड़ता है। विश्व प्रसिद्ध वास्तु ज्योतिष एवं तंत्र गुरु श्री मनीष साई जी के अनुसार किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली आकाश वृत्त में ग्रहों की उस समय की स्थिति का विवेचन है, जिस समय उसने इस जगत में जन्म लिया। सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करते हैं, किन्तु चंद्रमा पृथ्वी का एक उपग्रह होने से पृथ्वी का चक्कर 27 दिनों में पूरा करता है और एक राशि पर औसतन 2 दिन रहता है। इस प्रकार चंद्रमा को किसी राशि के एक अंश को पार करने में दो घंटे से भी कम का समय लगता है। तीव्र गति एवं पृथ्वी के निकटतम होने के कारण चंद्रमा का मानव जीवन पर प्रभाव बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। चंद्रमा श्वेत रंग, शीतल प्रकृति, जल तत्त्व, स्त्री स्वभाव एवं सतोगुणी ग्रह है और मन का कारक है। चंद्रमा सूर्य से जितना दूर...

बहु विवाह योग के कारण वैवाहिक रिश्ते ज्यादा नहीं चलते -मनीष साईं

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बहु विवाह योग के कारण वैवाहिक रिश्ते ज्यादा नहीं चलते -मनीष साईं आपने देखा होगा कि कई व्यक्तियों के रिलेशन स्थाई नहीं हो पाते वैवाहिक जीवन भी ज्यादा दिन नहीं चलता एक के बाद एक शादियां टूटती है।ज्योतिष शास्त्र मैं इसका स्पष्ट उल्लेख है ऐसा क्यों होता है उसके कारण क्या है? यह जानना बहुत जरूरी है। ज्योतिष वास्तु एवं तंत्र गुरु श्री मनीष साईं जी के अनुसार आइए जानते हैं बहु विवाह योग कैसे बनता है और उससे बचने के उपाय क्या हैं। ▪चन्द्र एवं शुक्र बलि होकर किसी भी भाव में एकसाथ स्थित हो तो ऐसे जातक के बहुत पत्नियाँ होगी। ▪लग्नेश उच्च अथवा स्वराशीगत केंद्र भावों में स्थित हो तो ऐसे जातक के बहुत विवाह होते है। ▪ लग्न में एक ग्रह उच्च राशी में स्थित हो तो भी ऐसे जातक से बहुत विवाह होते है। ▪ लग्नेश और चतुर्थ भाव का अधिपति केन्द्रीय भावों में स्थित हो तो भी ऐसे जातक के बहुत से विवाह होते है। ▪ शनि सप्तमेश हो तथा वह पापग्रह से युत हो तो ऐसे जातक से बहुत से विवाह होते है। ▪ बाली शुक्र की द्रष्टि सप्तम भाव पर हो तो भी ऐसे जातक से बहुत से विवाह होते है। ▪ कुंडली में बहु विवाह योग ब...

अमावस्या योग के कारण कहीं आप मानसिक रोग के शिकार तो नहीं -मनीष साईं

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अमावस्या योग के कारण कहीं आप मानसिक रोग के शिकार तो नहीं -मनीष साईं जब सूर्य और चन्द्रमा दोनों कुण्डली के एक ही घर में विराजित हो जावे तब इस दोष का निर्माण होता है। जैसे की आप सब जानते है की अमावस्या को चन्द्रमा किसी को दिखाई नही देता उसका प्रभाव क्षीण हो जाता है। ठीक उसी प्रकार किसी जातक की कुंडली में यह दोष बन रहा हो तो उसका चन्द्रमा प्रभावशाली नही रहता। चंद्रमा के प्रभावशील नहीं होने के कारण मन से संबंधित बीमारियां उत्पन्न होती है। विश्व प्रसिद्ध वास्तु,ज्योतिष एवं तंत्र गुरु श्री मनीष साईं जी के अनुसार चन्द्रमा को ज्योतिष में कुण्डली का प्राण माना जाता है और जब चन्द्रमा ही प्रभाव हीन हो जाए तो यह किसी भी जातक के लिए कष्टकारी हो जाता है क्योंकि यही हमारे मन और मस्तिक्ष का करक ग्रह है। इसलिए अमावस्या दोष को बहुत बुरे योगो में से एक माना है, जिसकी व्याख्या ज्योतिष शास्त्र में बड़े विस्तार से की है तथा उसके उपाय बताये है। ज्योतिष में ऐसा माना जाता है कि सूर्य और चन्द्र दो भिन्न तत्व के ग्रह है सूर्य अग्नि तत्व और चन्द्र जल तत्त्व, इस प्रकार जब दोनों मिल जाते है तो वाष्प बन जाती है ...

सावन में खत्म होगी तीन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती, तीन राशियों के लोग होंगे सुखी- मनीष साईं

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सावन में खत्म होगी तीन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती, तीन राशियों के लोग होंगे सुखी- मनीष साईं शनि की साढ़ेसाती सुनकर लोग घबरा जाते हैं। वाकई घबराने की भी बात है क्योंकि शनि यदि अपनी निगाह टेढ़ी कर दे तो अच्छे से अच्छा व्यक्ति सड़क पर आ जाता है। शनि की कृपा प्राप्त हो जाए तो सड़क पर खड़ा व्यक्ति मालामाल हो सकता है। विश्व प्रसिद्ध वास्तु एवं ज्योतिष गुरु श्री मनीष साई जी के अनुसार ज्योतिष शास्त्र मैं ऐसा संयोग बन रहा है कि सावन में 3 राशियों से शनि की साढ़ेसाती खत्म हो जाएगी।  इन तीन राशियों के सभी रुके हुए काम बनेंगे तथा जीवन इन लोगों का सुखमय होगा आइए जानते हैं वह तीन राशि कौन सी है। वृषभ राशि- इस राशि के लोगों को व्यापार में लाभ होगा नौकरी यदि नहीं मिल रही है तो वह जल्द मिल जाएगी। वृषभ राशि वालों के लिए कुबेर का खजाना खुलने वाला है क्योंकि उन्हें शनि की साढ़ेसाती खत्म होते ही धन लाभ होगा।कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। पारिवारिक तनाव दूर होगा तथा रुके हुए पैसे भी प्राप्त होंगे। मकर राशि- शनि की साढ़ेसाती खत्म होते ही कोई बड़ी खुशी की खबर मिलेगी। जीवन में परिवर्तन होग...

चंद्र ग्रहण पर विशेष

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▪▪चंद्र ग्रहण पर विशेष- जानिए राशि अनुसार ग्रहण में क्या करें क्या नहीं एवं ग्रहण का समय- मनीष साईं चंद्र ग्रहण कल 27 जुलाई 2018 को लग रहा है। इस दिन राशि अनुसार  क्या करें क्या नहीं ग्रहण में सूतक का समय क्या होगा ग्रहण कितने बजे से कितने बजे तक लगेगा इस बारे में श्री मनीष साईं  प्रसिद्ध वास्तु ज्योतिष एवं तंत्र विशेषज्ञ ने चंद्रग्रहण की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया, खास बात यह है कि यह ग्रहण संपूर्ण भारतवर्ष में दिखाई देगा तथा स्पर्श काल मध्यकाल एवं मोक्ष काल तक ग्रहण दिखाई देगा। खग्रास चंद्रग्रहण संपूर्ण यूरोप, अफ्रीका, एशिया तथा आस्ट्रेलिया महाद्वीप में दृश्य होगा।  न्यूजीलैंड के अधिकांश भाग में, जापान, रूस, चीन, अफ्रीका तथा यूरोप के अधिकांश भागों में दृश्य होगा। ◾सूतक का समय- यह ग्रहण 3 घंटा 55 मिनट का है। ग्रहण का स्पर्श काल रात्रि 11: 54 मिनट पर, मध्य काल रात्रि 1:52 पर एवं मोक्ष काल रात्रि 3: 49 मिनट पर है. चंद्र ग्रहण का सूतक काल दिन में  2:54 पर लग जाएगा जो भी शुभ कार्य हो, वह सभी कार्य सूतक काल से पूर्व ही कर लेना श्रेयस्कर होता है क्योंकि आज...

ज्योतिष के अनुसार मकान बनाने के योग

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ज्योतिष के अनुसार मकान बनाने के योग  ( लेखक -मनीष साईं वास्तु, ज्योतिष एवं तंत्र गुरु तथा देश के वरिष्ठ पत्रकार हैं) एक अच्छा घर बनाने की इच्छा हर व्यक्ति के जीवन की चाह होती है. व्यक्ति किसी ना किसी तरह से जोड़-तोड़ कर के घर बनाने के लिए प्रयास करता ही है। कुछ ऎसे व्यक्ति भी होते हैं जो जीवन भर प्रयास करते हैं लेकिन किन्हीं कारणो से अपना घर फिर भी नहीं बना पाते हैं। कुछ ऎसे भी होते हैं जिन्हें संपत्ति विरासत में मिलती है और वह स्वयं कुछ भी नहीं करते हैं। बहुत से अपनी मेहनत से एक से अधिक संपत्ति बनाने में कामयाब हो जाते हैं। जन्म कुंडली के ऎसे कौन से योग हैं जो मकान अथवा भूमि अर्जित करने में सहायक होते हैं, उनके बारे में आज इस लेख के माध्यम से जानने का प्रयास करेगें। स्वयं की भूमि अथवा मकान बनाने के लिए चतुर्थ भाव का बली होना आवश्यक होता है, तभी व्यक्ति घर बना पाता है। मंगल को भूमि का और चतुर्थ भाव का कारक माना जाता है, इसलिए अपना मकान बनाने के लिए मंगल की स्थिति कुंडली में शुभ तथा बली होनी चाहिए। मंगल का संबंध जब जन्म कुंडली में चतुर्थ भाव से बनता है तब व्यक्ति अपने ज...