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दुर्गाष्टमी पर पूजन, मंत्र, स्त्रोत्र,उपाय- मनीष साईं

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नवरात्रि का आठवां दिन दुर्गाष्टमी पर पूजन, मंत्र, स्त्रोत्र,उपाय- मनीष साईं नवरात्रि में आठवें दिन महागौरी शक्ति की पूजा की जाती है। नाम से प्रकट है कि इनका रूप पूर्णतः गौर वर्ण है। पति रूप में शिव को प्राप्त करने के लिए महागौरी ने कठोर तपस्या की थी। इसी वजह से इनका शरीर काला पड़ गया लेकिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इनके शरीर को गंगा के पवित्र जल से धोकर कांतिमय बना दिया।उनका रूप गौर वर्ण का हो गया। इसीलिए यह महागौरी कहलाईं। इनकी उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है। अष्टवर्षा भवेद् गौरी यानी इनकी आयु आठ साल की मानी गई है। इनके सभी आभूषण और वस्त्र सफेद हैं। इसीलिए उन्हें श्वेताम्बरधरा कहा गया है। 4 भुजाएं हैं और वाहन वृषभ है इसीलिए वृषारूढ़ा भी कहा गया है इनको। इनके ऊपर वाला दाहिना हाथ अभय मुद्रा है तथा नीचे वाला हाथ त्रिशूल धारण किया हुआ है। ऊपर वाले बांए हाथ में डमरू धारण कर रखा है और नीचे वाले हाथ में वर मुद्रा है। इनकी पूरी मुद्रा बहुत शांत है।मां गौरी की उपासना नीचे लिखे श्रोत के हिसाब से करनी चाहिए। या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै ...
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मानसिक तथा शारीरिक व्याधि को दूर करता है यह अचूक मंत्र-मनीष साईं  व्यक्ति के जीवन में तमाम तरह के कष्ट होते हैं तथा शारीरिक व्याख्या भी उसके जीवन को दुखमय बना देती है ऐसे में हमारे शास्त्रों में इन सभी कष्टों एवं दुखों से निजात पाने के लिए महत्वपूर्ण एवं अचूक मंत्र बताए गए हैं यह मंत्र भी पूर्ण भाव से करने पर शत प्रतिशत परिणाम देता है। #मंत्रचिकित्सा #सर्वदुखविनाशकमंत्र#व्यापार #धर्म #अध्यात्म #तंत्र #मंत्र #सनातनधर्म #हिंदूधर्म #ज्योतिष #वास्तु #टोने #टोटके #DhuniMai #sainath #omsai #saibless #shirdibaba #omsairam #ram #sairam #saibabaofindia #saibabaofshirdi #jaisai #blessingsofsai #allahmalik #saiblessings #shradaaursaburi #godblessings #mygod #godisgood #india #sailife #spiritual #maharashtra #instadailywhy #baba #saturday #morningall #dailymessage #teachings #follow

नवरात्रि का सातवां दिन ग्रह- बाधाओं को दूर करती है मां काली- मनीष साईं

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नवरात्रि का सातवां दिन ग्रह- बाधाओं को दूर करती है मां काली- मनीष साईं नवरात्र केे सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। मां का यह रूप काफी विकराल और भयानक है लेकिन बहुत फलदायी है। आज के दिन साधक का मन 'सहस्रार' चक्र में प्रवेश कर जाता है। मां काली को 'शुभंकारी' भी कहते है। दानव, दैत्य, राक्षस, भूत, प्रेत आदि इनके स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते हैं। ये ग्रह-बाधाओं को भी दूर करने वाली हैं। ऐसे लोग जो किसी कृत्या प्रहार से पीड़ित हो एवं उन पर किसी अन्य तंत्र-मंत्र का प्रयोग हुआ हो, वे इनकी साधना कर समस्त कृत्याओं तथा शत्रुओं से निवृत्ति पा सकते हैं। दुर्गा के नौ रुपों में सातवां रुप है देवी कालरात्रि का इसलिए नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। शास्त्रों में बताया गया है कि कालरात्रि का स्वरूप काल को भी भयभीत करने वाला है। स्याह रात्रि के समान माता का स्वरूप काला है। कालारात्रि माता गले में विद्युत की माला धारण करती हैं। इनके बाल खुले हुए हैं और गर्दभ की सवारी करती हैं। माता के हाथ में कटा हुआ सिर है जिससे रक्त टपकता रहता है। भयंकर...

कैंसर में लाभ के लिए मंत्र जाप करें- मनीष साई

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कैंसर के रोगी या  परिवार का कोई भी सदस्य संकल्प लेकर प्रातः काल भगवान शिव का कच्चे दूध एवं जल से अभिषेक कर पांच माला प्रतिदिन इस मंत्र का जाप करता है तो कैंसर की बीमारी में लाभ होता है।

नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी की पूजा से विवाह में होने वाली बाधा खत्म होती है- मनीष साईं

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नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी की पूजा से विवाह में होने वाली बाधा खत्म होती है- मनीष साईं नवरात्रि का छठा दिन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि जिन व्यक्तियों का गुरु अस्त होता है या किसी पाप ग्रह के साथ कुंडली में युति बनाता है ऐसे में मां कात्यायनी की पूजा से ऐसे जातकों को बहुत लाभ होता है। विवाह में होने वाली बाधाएं मां कात्यायनी की पूजा से खत्म होती है। नवरात्रि में आज मां के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। मां कात्यायनी का जन्म कात्यायन ऋषि के घर हुआ था अतः इनको कात्यायनी कहा जाता है। इनकी चार भुजाओं में अस्त्र-शस्त्र और कमल का पुष्प है, इनका वाहन सिंह है। ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं, गोपियों ने कृष्ण की प्राप्ति के लिए इनकी पूजा की थी। महिषासुर का वध करने वाली मां कात्यायनी ही हैं। देवी के इस रूप की सबसे अद्भुत बात ये कि इन्होंने अपने पिता के वंश नाम को आगे बढ़ाया। जबकि आमतौर पर ये अधिकार केवल पुत्रों को ही मिला करता है। कहते हैं मां कात्यायनी की कृपा से विवाह में आ रही बाधा भी बड़ी ही आसानी से दूर हो जाती हैं। विवाह सम्बन्धी मामलों के लिए इनकी पू...
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नवरात्रि का पांचवा दिन स्कंद माता की पूजा से खुलता है मोक्ष का द्वार- मनीष साईं नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। चार भुजाओं वाली मां दुर्गा के रूप के गोद में विराजमान होते हैं कुमार कार्तिकेय। इन्हें मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता भी कहा जाता है। मान्यता है कि स्कंदमाता की पूजा करने वाले माता के भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। ▪कौन हैं मां स्कंदमाता?- चार भुजाओं वाली मां स्कंदमाता के दो हाथों में कमल और एक हाथ में कुमार कार्तिकेय बैठे रहते हैं. कुमार कार्तिकेय को देवताओं का सेनापति कहा जाता है। देवताओं के इसी सेनापति का एक नाम स्कंद भी है। इन्हीं स्कंद की माता हैं स्कंदमाता। ▪मां स्कंदमाता का रूप - शेर पर सवार, चार भुजाएं और गोद में कुमार कार्तिकेय, ये है स्कंदमाता का रूप। यह कमल पर भी विराजमान रहती हैं इसीलिए इन्हें पद्मासना के नाम से भी जाना जाता है। ▪कैसे करें स्कंदमाता की पूजा- गंगाजल से मां को स्नान कराएं मां स्कंदमाता का पूजन सफेद रंग के वस्त्र पहन कर करें और उन्हें मूंग के दाल के हलवे का भोग लगाए और प्रसाद में बांटे। मान्यता है कि ...

विशेष पूजा कर मां चंद्रघंटा को प्रसन्न करें -मनीष साईं

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▪नवरात्रि का तीसरा दिन-   विशेष पूजा कर मां चंद्रघंटा को प्रसन्न करें -मनीष साईं  नवरात्रि में हर दिन मां के अलग-अलग स्वरूपों की साधना की जाती है और मां के हर रूप की अलग महिमा भी है। नवरात्रि के तीसरे दिन देवी के तृतीय स्वरूप चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। माता के सिर पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है. इसी वजह से इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। देवी चंद्रघंटा का वाहन सिंह है। इनकी दस भुजाएं और तीन आंखें हैं. आठ हाथों में खड्ग, बाण आदि दिव्य अस्त्र-शस्त्र हैं और दो हाथों से ये भक्तों को आशीष देती हैं। इनका संपूर्ण शरीर दिव्य आभामय है। इनके दर्शन से भक्तों का हर तरह से कल्याण होता है। माता भक्तों को सभी तरह के पापों से मुक्त करती हैं।इनकी पूजा से बल और यश में बढ़ोतरी होती है। स्वर में दिव्य अलौकिक मधुरता आती है। देवी की घंटे-सी प्रचंड ध्वनि से भयानक राक्षसों आदि भय खाते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के 9 रूपों की पूजा की जाती है। नवदुर्गा हिंदू धर्म में माता दुर्गा या पार्वती के 9 रूपों को एक साथ कहा जाता है।इन्हें पापों की विनाशिनी कहा जाता है। हर देवी के अलग-अलग वाह...