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डाइनिंग टेबल वास्तु अनुरूप रखने से बीमारियां होती है दूर- मनीष साईं

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डाइनिंग टेबल वास्तु अनुरूप रखने से बीमारियां होती है दूर- मनीष साईं ▪ जानिए कौन सी दिशा में रखें डाइनिंग टेबल। ▪ भोजन करते समय किस दिशा में बैठे यह भी जाने। शास्त्रों में कहा जाता है कि  जैसा अन्न वैसा मन, अन्न के महत्व को तो प्रतिपादित किया है साथ ही अन्न कहां बैठकर खाना चाहिए इस बात को भी महत्त्व दिया है। विश्व प्रसिद्ध वास्तु,ज्योतिष एवं तंत्र गुरु मनीष साईं जी के अनुसार डाइनिंग टेबल यूं तो महज खाने की टेबल मानी जाती है, लेकिन वास्तु के हिसाब से इस टेबल का बड़ा महत्व है। हमारे जीवन पर इस टेबल का पूरा प्रभाव पड़ता है। हमारे घर में डाइनिंग टेबल कहां है, हम इस टेबल पर किस दिशा में बैठकर खाना खाते हैं, इन सबसे हमारा जीवन प्रभावित होता है। रेमेडियल वास्तु में भोजन से स्वास्थ्य कैसे अच्छा रहे और भोजन करने के पहले किन किन सिद्धांतों का पालन करना चाहिए इसका स्पष्ट उल्लेख मिलता है। गुरुदेव मनीष साईं जी के अनुसार जीवन में हम दिन-रात भागदौड़ करते हैं, ताकि सुकून से दो वक्त का खाना खा सकें। खाना खाना और खिलाना सिर्फ उदर पूर्ति तक सीमित नहीं है, यह भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा रह...

गलत स्थान पर रखा टीवी बन सकता है डिप्रेशन का कारण: मनीष साई

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▪ जानिए टीवी रखने का सही स्थान वास्तु अनुसार। ▪ किस स्थान पर टीवी रखने से क्या फायदे हैं यह भी पढ़िए। वास्तु के अनुसार  घर का हर कोना  कुछ न कुछ कहता है। किस स्थान पर क्या होना चाहिए घर ऑफिस या फैक्ट्री  सभी जगह का अपना एक प्रबंधन होता है,और यह प्रॉपर तरीके से हो तो इसके परिणाम  लाभदायक होते हैं। जहां हम रहते हैं या काम करते हैं वहां  की बनावट और आंतरिक सजावट बहुत कुछ कहती है। घर या कार्यालय में  रखे या सजे हुए सामानों का भी अपना महत्व है, फिर वह हमारे मनोरंजन के साधन टीवी  ही क्यों न हो। बात जब टीवी की आती है, तो उसका स्थान भी महत्व रखता है। यदि यह उत्तर से उत्तरपूर्व की तरफ लगा है, तो यहां पर रहने वाले लोग या जो लोग यहां टीवी देखेंगे, वह अपने करियर, धार्मिक और आध्यत्मिक विषयों और स्वयं के स्वास्थ्य के बारे में ज्यादा सोचेंगे तथा इसी से संबंधित कार्यक्रम में रुचि लेंगे। जीवन के इसी क्षेत्र की तरफ ज्यादा रुझान दिखाएंगे। इसी तरफ उनकी सजगता भी बढ़ेगी। टीवी दक्षिण-पूर्व में लगा होगा आर्थिक हालातों की चिंता करेंगे। दक्षिण-पश्चिम में लगा होगा टीवी त...

घर मैं गलत स्थान पर रखी किताबें बन सकती है असफलता का कारण: मनीष साईं

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घर मैं गलत स्थान पर रखी किताबें बन सकती है असफलता का कारण: मनीष साईं सदियों से वास्तु शास्त्र के  नियमों का अपना महत्त्व चला आ रहा है। प्राचीन समय में  मठ,मंदिर और गिरजा घरों में  तथा ऋषि मुनियों के आश्रमों में धार्मिक किताबें  भी दिशा अनुसार रखी जाती थी। आज भी यह बात 100% प्रासंगिक है अगर बात किताबों की हो तो उसमें लिखित ज्ञान का प्रयोग करके आप जीवन में सफलता प्राप्त करते हैं, इसलिए उन्हें हमेशा व्यवस्थित करके बुकशेल्फ/ अलमारी में ही रखना चाहिए लेकिन बुकशेल्फ/ अलमारी को रखते समय वास्तु के इन नियमों का खासतौर पर ध्यान दें। यदि वास्तु के नियमों का आपने ध्यान नहीं दिया तो किताबें ही आपकी असफलता का कारण बन सकती है। ▪ वास्तु के अनुसार, बुकशेल्फ को हमेशा दक्षिण या पश्चिम में ही रखना चाहिए। बुक शेल्फ दक्षिण या पश्चिम में होने से सफलता मिलती है। यदि किसी और दिशा में किताबें रखी है और माना कि वह दिशा धन या स्वास्थ्य की है। किताबे आपके द्वारा व्यवस्थित नहीं रखी गई तो घर में धन की आवक रुक जाएगी घर में रहने वालों का स्वास्थ्य खराब रहने लगेगा। ▪ किताबे कभी खुली नहीं रख...

पलंग की दिशा बदलकर सुख की नींद ले- मनीष साईं

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पलंग की दिशा बदलकर सुख की नींद ले- मनीष साईं रेमेडियल वास्तु में सुख की नींद  यानी चैन से सोने के लिए  पलंग के डायरेक्शन का भी बहुत महत्व है यदि आप का पलंग  गलत दिशा में रखा है  तो आप कभी चैन की नींद नहीं सो सकते  जीवन में तनाव हमेशा बना रहेगा। कुछ लोग इन बातों को नहीं मानते  लेकिन मेरे इस वास्तु टिप्स को एक बार अजमा कर देखे,कुछ ही दिनों में आपको इसका प्रमाण मिलेगा। बेडरूम रूम घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। बेडरूम की सबसे महत्वपूर्ण चीज है पलंग। वास्तु के अनुसार पलंग दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। पलंग को दक्षिण दिशा की दीवार के साथ होना चाहिए। सोते समय सिर दक्षिण की ओर और पैर उत्तर में होने चाहिए। ध्यान रहे पलंग दीवार के एकदम बीच में होना चाहिए। यही पलंग की बेडरूम में एकदम सही दिशा है। कुछ लोग पलंग का डायरेक्शन सही नहीं रखते और उनके पैर  दक्षिण की तरफ होते हैं। ऐसा होने से वह बीमार रहते हैं। वैज्ञानिक कारण भी है कि गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण सोते समय दक्षिण  की ओर कभी पैर नहीं रखना चाहिए क्योंकि दक्षिण का हिस्सा ऊंचा ह...

घर में गलत स्थान पर बनी गाड़ी की पार्किंग तनाव का कारण तो नहीं -मनीष साईं

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जानिए वास्तु अनुसार घर में वाहन कहां खड़ा करें। घर में गलत स्थान पर बनी गाड़ी की पार्किंग तनाव का कारण तो नहीं -मनीष साईं क्या आप जानते हैं कि आप जिस जिस स्थान पर वाहन रखते हैं कहीं ऐसा तो नहीं उस स्थान के कारण आपके जीवन में तमाम तरह की परेशानियां आ रही है? रेमेडियल वास्तु के अनुसार हर घर को नो हिस्से में विभाजित किया जाता है जिसमें करियर, स्वास्थ्य, रिलेशन, धन, प्रोजेक्ट, व्यापार, यश और प्रसिद्धि जैसे हिस्से होते हैं। वाहन रखने का सही स्थान दक्षिण-पश्चिम है। यदि इसके अलावा किसी स्थान पर वाहन रखते हैं तो निश्चित तौर पर वास्तु दोष उत्पन्न होते हैं। इन वास्तु दोषों से निपटने के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स आपको प्रदान कर रहा हूं उन्हें करें। इन वास्तु टिप्स को अपनाकर  गलत स्थान पर भी आपका वाहन रखा है तो आपके जीवन में परेशानी उत्पन्न नहीं करेगा। यदि आप नया घर बना रहे हैं तो दक्षिण-पश्चिम में ही आप गैरेज बनाइए। रेमेडियल वास्तु केवल घरों या दुकानों के लिए ही नहीं होता, वरन इसका प्रयोग कर आप किसी वाहन को अपने लिए लकी भी बना सकते हैं।इसके लिए आपको कुछ विशेष बातों पर ध्यान देना होगा त...

बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता, जानिए किस स्थान पर बैठ कर पढ़ाई करें -मनीष साईं

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बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता, जानिए किस स्थान पर बैठ कर पढ़ाई करें -मनीष साईं सभी माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ लिखकर लायक बने  अच्छे नंबर आए  पता प्रतिस्पर्धा  के इस युग में  प्रतियोगी परीक्षाओं में  सफल होकर  अपने करियर और जीवन को  उन्नत बना सके  लेकिन छोटी-छोटी गलतियों के कारण  वास्तु के अनुसार  पढ़ाई ना करने के कारण  मेहनत करने के बावजूद परिणाम  नकारात्मक आते हैं । रेमेडियल वास्तुशास्‍त्र के मुताबिक, यदि अध्ययन कक्ष सही दिशा में न हो, तो इससे बच्चे की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। वह जितनी चाहे मेहनत कर ले, लेकिन वास्तुदोष के कारण उसे मेहनत के अनुरूप परिणाम नहीं मिल पाता। इसलिए बच्चे के पढ़ने के लिए अध्ययन कक्ष में दिशा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। वास्तु नियमों के अनुसार, बच्चों के पढ़ने का कमरा यानी अध्ययन कक्ष उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में इस प्रकार होना चाहिए कि पढ़ाई करते समय चेहरा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहे।  पढ़ाई हेतु कमरे में पुस्तकों की रैक या अलमारी पूर्व या उत्तर दिशा में होनी चाहिए और...

12 घातक योग व दोष, तुरंत करें ये उपाय नहीं तो हो जाएंगे बर्बाद- मनीष साईं

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12 घातक योग व दोष, तुरंत करें ये उपाय नहीं तो हो जाएंगे बर्बाद- मनीष साईं जब कोई शुभ ग्रह अशुभ ग्रह के साथ युति बनाता है अलग-अलग भाव में शुभ-अशुभ योग बनाता है। जन्म कुंडली में 2 या उससे ज्यादा ग्रहों की युति, दृष्टि, भाव आदि के मेल से योग का निर्माण होता है। ग्रहों के योगों को ज्योतिष फलादेश का आधार माना गया है। अशुभ योग के कारण व्यक्ति को जिंदगीभर दु:ख झेलना पड़ता है। आओ जानते हैं कि कौन-कौन से अशुभ योग होते हैं और क्या है उनका निवारण?  ◼ पितृदोष- ज्योतिष के अनुसार पितृ दोष और पितृ ऋण से पीड़ित कुंडली शापित कुंडली कही जाती है। ऐसे व्यक्ति अपने मातृपक्ष अर्थात माता के अतिरिक्त मामा-मामी मौसा-मौसी, नाना-नानी तथा पितृपक्ष अर्थात दादा-दादी, चाचा-चाची, ताऊ-ताई आदि को कष्ट व दुख देता है और उनकी अवहेलना व तिरस्कार करता है। जन्म पत्री में यदि सूर्य पर शनि राहु-केतु की दृष्टि या युति द्वारा प्रभाव हो तो जातक की कुंडली में पितृ ऋण की स्थिति मानी जाती है। इसके अलावा भी अन्य कई स्थितियां होती है। हालांकि इसके अलावा व्यक्ति अपने कर्मों से भी पितृदोष निर्मित कर लेता है। विद्वानों ने प...