गृहिणियां रखें कुछ बातों का ध्यान मानसिक तनाव व शारीरिक कष्ट दूर होंगे अपने आप- मनीष साईं
गृहिणियां रखें कुछ बातों का ध्यान मानसिक तनाव व शारीरिक कष्ट दूर होंगे अपने आप- मनीष साईं
घर को सजाने, संवारने एवं प्रत्येक वस्तु को व्यवस्थित रखने का दायित्व गृहणियों पर होता है। अपने घर को और अधिक आरामदायक व सुंदर बनाना लगभग हर गृहिणी का सपना होता है और वे घर को विभिन्न तरीकों से सजा कर उन सपनों में इंद्रधनुषी रंग भरती हैं।
पहले उच्चवर्ग में ही गृहसज्जा अधिक प्रजलित थी किन्तु अब अन्य वर्गों का भी इस ओर रुझान बढ़ा है। अत: वास्तु ज्ञान में कुछ बातें ऐसी हैं जिनके पालन करने से ‘वास्तु’ से संबंधित अनेक दोष दूर हो जाते हैं।
घर को सजाना या उसका नवीनीकरण करना हमारी सोच और उस घर की स्थिति, व्यक्ति की इच्छाओं तथा आवश्यकताओं पर निर्भर करता है। हर गृहिणी का उद्देश्य होता है कि उसके घर की सजावट सुंदर हो और उसके हर कोने का इस्तेमाल हो सके। यदि जगह बड़ी हो तो कोई दिक्कत नहीं होती पर जगह छोटी हो तो पूरी का सदुपयोग करना चाहिए। घर की सुख-शांति व पवित्रता का वातावरण बनाए रखने के लिए इस दिशा में गृहिणियों को क्या ध्यान रखना चाहिए आइए देखें :
🔶घर के मध्य में यदि कोई चौक है तो उसे हमेशा खाली व साफ रखना चाहिए, क्योंकि वह ब्रह्म स्थान है।
🔶घर में समृद्धि के लिए प्रवेश द्वार पर कुबेर या गणपति की प्रतिमाएं स्थापित करनी चाहिएं।
🔶कूड़ा-कर्कट ईशान दिशा में कभी इकट्ठा न होने दें। ईशान दिशा पवित्र स्थान है। यहां झाड़ू कभी न रखें। इस दिशा को अशुद्ध रखने पर मानसिक तनाव व शारीरिक कष्ट होता है।
🔶उत्तर दिशा कुबेर का स्थान है अत: गल्ला रुपए आदि इसी दिशा में रखें।
🔶भारी सामान (सोफासैट , अलमारी, पलंग) दक्षिण व पश्चिम दिशा में रखना चाहिए।
🔶 पलंग का सिरहाना (तकिया) दक्षिण की ओर रखें तथा पलंग दीवार से सटाकर रखें।
🔶घर में तुलसी, चंदन, जूही, मोगरा, मालती, अनार आदि के पौधे व लताएं लगानी चाहिएं।
🔶 रसोई घर में प्लेटफार्म (चूल्हा रखने हेतु) आग्नेय दिशा में बनवाना चाहिए तथा खाना बनाते समय गृहणियों का मुंह आग्नेय या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। इसमें दुर्घटना की आशंका कम हो जाती है और कमर में पांव या एड़ी में दर्द की शिकायत नहीं रहती।
🔶घर में पूजा का स्थल ईशान दिशा में उत्तम होता है।
🔶रसोई घर में पूजा स्थल कभी न बनाएं।
🔶दैनिक उपयोग में आने वाला जल ईशान दिशा में रखना चाहिए।
🔶ईशान दिशा के कमरे को स्टोर रूम कभी न बनाएं।
🔶घर में साज-सज्जा हेतु कबूतर, बाज, सांप, सियार, उल्लू, गिद्ध,सूअर, शेर आदि के चित्र न लगाएं।
🔶बेर, कीकर, बबूल, कैक्टस (नागफनी) आदि के पेड़ न लगाएं।
🔶बच्चों के पढऩे की व्यवस्था इस प्रकार करनी चाहिए कि पढ़ते समय उनका मुंह उत्तर की ओर रहे। इससे मस्तिष्क की एकाग्रता व इच्छा शक्ति बढ़ती है ।
🔶आपके जीवन में वास्तु एवम ज्योतिष संबंधित कोई भी परेशानी है।पैसा आता है, लेकिन रुकता नहीं है। बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता है ।पति पत्नी के रिलेशन ठीक नहीं रहता। सब कुछ होने के बाद भी तनाव रहता है। तो आप हमारे आश्रम पर आकर परामर्श प्राप्त कर सकते हैं साई अन्नपूर्णा सोशल फाउंडेशन एक चेरिटेबल ट्रस्ट से और उसके द्वारा तीस लाख परिवारो के जीवन में परिवर्तन लाया गया है आप भी जीवन परिवर्तन का एक हिस्सा बन सकते हैं।
🔶 हमारा पता है
साईं अन्नपूर्णा सोशल फाउंडेशन
135, सहयोग विहार शाहपुरा थाने के सामने भोपाल मध्य प्रदेश
संपर्क -9617950498
Whatsapp नंबर-07000632297
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घर को सजाने, संवारने एवं प्रत्येक वस्तु को व्यवस्थित रखने का दायित्व गृहणियों पर होता है। अपने घर को और अधिक आरामदायक व सुंदर बनाना लगभग हर गृहिणी का सपना होता है और वे घर को विभिन्न तरीकों से सजा कर उन सपनों में इंद्रधनुषी रंग भरती हैं।
पहले उच्चवर्ग में ही गृहसज्जा अधिक प्रजलित थी किन्तु अब अन्य वर्गों का भी इस ओर रुझान बढ़ा है। अत: वास्तु ज्ञान में कुछ बातें ऐसी हैं जिनके पालन करने से ‘वास्तु’ से संबंधित अनेक दोष दूर हो जाते हैं।
घर को सजाना या उसका नवीनीकरण करना हमारी सोच और उस घर की स्थिति, व्यक्ति की इच्छाओं तथा आवश्यकताओं पर निर्भर करता है। हर गृहिणी का उद्देश्य होता है कि उसके घर की सजावट सुंदर हो और उसके हर कोने का इस्तेमाल हो सके। यदि जगह बड़ी हो तो कोई दिक्कत नहीं होती पर जगह छोटी हो तो पूरी का सदुपयोग करना चाहिए। घर की सुख-शांति व पवित्रता का वातावरण बनाए रखने के लिए इस दिशा में गृहिणियों को क्या ध्यान रखना चाहिए आइए देखें :
🔶घर के मध्य में यदि कोई चौक है तो उसे हमेशा खाली व साफ रखना चाहिए, क्योंकि वह ब्रह्म स्थान है।
🔶घर में समृद्धि के लिए प्रवेश द्वार पर कुबेर या गणपति की प्रतिमाएं स्थापित करनी चाहिएं।
🔶कूड़ा-कर्कट ईशान दिशा में कभी इकट्ठा न होने दें। ईशान दिशा पवित्र स्थान है। यहां झाड़ू कभी न रखें। इस दिशा को अशुद्ध रखने पर मानसिक तनाव व शारीरिक कष्ट होता है।
🔶उत्तर दिशा कुबेर का स्थान है अत: गल्ला रुपए आदि इसी दिशा में रखें।
🔶भारी सामान (सोफासैट , अलमारी, पलंग) दक्षिण व पश्चिम दिशा में रखना चाहिए।
🔶 पलंग का सिरहाना (तकिया) दक्षिण की ओर रखें तथा पलंग दीवार से सटाकर रखें।
🔶घर में तुलसी, चंदन, जूही, मोगरा, मालती, अनार आदि के पौधे व लताएं लगानी चाहिएं।
🔶 रसोई घर में प्लेटफार्म (चूल्हा रखने हेतु) आग्नेय दिशा में बनवाना चाहिए तथा खाना बनाते समय गृहणियों का मुंह आग्नेय या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। इसमें दुर्घटना की आशंका कम हो जाती है और कमर में पांव या एड़ी में दर्द की शिकायत नहीं रहती।
🔶घर में पूजा का स्थल ईशान दिशा में उत्तम होता है।
🔶रसोई घर में पूजा स्थल कभी न बनाएं।
🔶दैनिक उपयोग में आने वाला जल ईशान दिशा में रखना चाहिए।
🔶ईशान दिशा के कमरे को स्टोर रूम कभी न बनाएं।
🔶घर में साज-सज्जा हेतु कबूतर, बाज, सांप, सियार, उल्लू, गिद्ध,सूअर, शेर आदि के चित्र न लगाएं।
🔶बेर, कीकर, बबूल, कैक्टस (नागफनी) आदि के पेड़ न लगाएं।
🔶बच्चों के पढऩे की व्यवस्था इस प्रकार करनी चाहिए कि पढ़ते समय उनका मुंह उत्तर की ओर रहे। इससे मस्तिष्क की एकाग्रता व इच्छा शक्ति बढ़ती है ।
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