अंगारक योग के उपाय

🛑🛑विश्व प्रसिद्ध वास्तु ज्योतिष एवं तंत्र गुरु मनीष साईं जी के अनुसार अंगारक योग के उपाय🛑🛑

🚩🚩कुंडली में मंगल और राहु साथ है तो व्यक्ति हिंसक होता है, दुर्घटनाओं का शिकार भी- मनीष साईं

कुंडली में  जब मंगल  असुर प्रकृति वाले  राहु केतु के साथ  स्थित होता है  तो एक विशेष प्रकार का योग "अंगारक" निर्मित होता है,।ज्योतिष में मंगल को क्रोध, वाद विवाद, लड़ाई झगड़ा, हथियार, दुर्घटना, एक्सीडेंट, अग्नि, विद्युत आदि का कारक ग्रह माना गया है तथा राहु को आकस्मिकता, आकस्मिक घटनाएं, शत्रु, षड़यंत्र, नकारात्मक ऊर्जा, तामसिकता, बुरे विचार, छल, और बुरीआदतों का कारक ग्रह माना गया है, इसलिए ज्योतिष में मंगल और राहु के योग को  अधिक  नकारात्मक और दुष्परिणाम  देने वाला   योग माना गया है। मंगल और राहु स्वतंत्र रूप से अलग-अलग इतने नाकारात्मक नहीं होते पर जब मंगल और राहु का योग होता है तो इससे मंगल और राहु की नकारात्मक प्रचंडता बहुत बढ़ जाती है। जिस कारण यह योग विध्वंसकारी प्रभाव दिखाता है।मंगल राहु का योग प्राकृतिक और सामाजिक उठापटक की स्थिति तो बनाता ही है पर व्यक्तिगत रूप से भी मंगल -राहु का योग नकारात्मक परिणाम देने वाला ही होता है।

यदि जन्मकुंडली में मंगल और राहु एक साथ हो अर्थात कुंडली में मंगल राहु का योग हो तो सर्वप्रथम तो कुंडली के जिसभाव में यह योग बन रहा हो उस भावको पीड़ित करता है और उस भाव से नियंत्रित होने वाले घटकों में संघर्ष कीस्थिति बनी रहती है। अंगारक योग बहुत खराब होता है इससे व्यक्ति के जीवन में लड़ाई-झगड़े तथा अराजकता फैलाने की प्रवृत्ति बढ़ती है आज मैं आपको 12 भावों में यह योग क्या नुकसान पहुंचाता है, प्रत्येक 12 भावों के उपाय क्या है इसके बारे में विस्तृत रूप से बताऊंगा।

🛑 कुंडली के 12 भाव में अंगारक योग से होने वाला नुकसान-

▪ प्रथम भाव में अंगारक योग होने से पेट रोग, शरीर पर चोट, अस्थिर मानसिकता, क्रूरता होती है।
▪द्वितीय भाव में अंगारक योग होने से धन में उतार-चढ़ाव व व्यक्ति का घर-बार बरबाद हो जाता है।
▪ तृतीय भाव में अंगारक योग होने से भाइयों से कटु संबंध बनते हैं परंतु व्यक्ति धोखेबाजी से सफल हो जाता है।
▪चतुर्थ भाव में अंगारक योग होने से माता को दुख व भूमि संबंधित विवाद होते हैं।
▪ पंचम भाव में अंगारक योग होने से संतानहीनता व जुए-सट्टे से लाभ होता है।
▪छटम भाव में अंगारक योग होने से ऋण लेकर उन्नति होती है। व्यक्ति खूनी या शल्य-चिकित्सक भी बन सकता है।
▪सप्तम भाव में अंगारक योग होने से दुखी विवाहित जीवन, नाजायज संबंध, विधवा या विधुर होना परंतु सांझेदारी से लाभ भी मिलता है।
▪अष्टम भाव में अंगारक योग होने से पैतृक सम्पत्ति मिलती है परंतु सड़क दुर्घटना के प्रबल योग बनते हैं।
▪नवम भाव में अंगारक योग होने से व्यक्ति भाग्यहीन, वहमी, रूढ़ीवादी व तंत्रमंत्र में लिप्त होते हैं।
▪ दशम भाव में अंगारक योग होने से व्यक्ति अति कर्मठ, मेहनतकश, स्पोर्टमेन व अत्यधिक सफल होते है।
▪  एकादश भाव में अंगारक योग होने से प्रॉपर्टी से लाभ मिलता है। व्यक्ति चोर, कपटी धोखेबाज़ होते हैं।
▪द्वादश भाव में अंगारक योग होने से इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट व रिश्वतख़ोरी से लाभ। ऐसे व्यक्ति बलात्कार जैसे अपराधों में भी लिप्त होते हैं।

 🛑 कुंडली के बारह घरों में मंगल-राहु अंगारक योग के उपाय-

1- कुंडली के पहले घर में मंगल-राहु अंगारक योग होने पर रेवडिय़ां, बताशे पानी में बहाएं।ॐ अंग अंगारकाय नमः कानियमित जाप करें।हनुमान चालीसा का पाठ करें। प्रत्येक मंगलवार को गाय को गुड़ खिलाएं।

2- कुंडली के दूसरे भाव में अंगारक योग होने पर चांदी की अंगूठी उल्टे हाथ की लिटील फिंगर में पहनें।ॐ अंग अंगारकाय नमः कानियमित जाप करें।हनुमान चालीसा का पाठ करें। सात चक्र पावर ग्रिड के नीचे फोटो रखें।

3- जिन लोगों की कुंडली के तीसरे भाव में ये योग होता है वह घर में हाथी दांत रखें।ॐ अंग अंगारकाय नमः कानियमित जाप करें।हनुमान चालीसा का पाठ करें।

4- कुंडली के चौथे भाव में ये योग होने पर सोना, चांदी और तांबा तीनों को मिलाकर अंगूठी पहनें।ॐ अंग अंगारकाय नमः कानियमित जाप करें।हनुमान चालीसा का पाठ करें। सात चक्र पावर ग्रिड के नीचे फोटो रखें।

5- कुंडली के पांचवें भाव में अंगारक योग होने पर रात को सिरहाने पानी का बर्तन भरकर रखें और सुबह उठते ही पेड़-पौधों में डालें।ॐ अंग अंगारकाय नमः का नियमित जाप करें।हनुमान चालीसा का पाठ करें।

6-जिन लोगों की कुंडली के  छठे घर में अंगारक योग होने पर कन्याओं को दूध और चांदी का दान दें।ॐ अंग अंगारकाय नमः कानियमित जाप करें।हनुमान चालीसा का पाठ  प्रतिदिन करें। प्रत्येक मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ करें।

7- कुंडली के सातवें भाव में अंगारक योग होने पर चांदी की ठोस गोली अपने पास रखें।ॐ अंग अंगारकाय नमः कानियमित जाप करें।हनुमान चालीसा का पाठ करें।

 8- जिन लोगों की कुंडली के  आठवें घर में अंगारक योग बनता है तो एक तरफ सिकी हुई मीठी रोटियां कुत्तों को डालें।ॐ अंग अंगारकाय नमः कानियमित जाप करें।हनुमान चालीसा का पाठ करें।

9- कुंडली के नवें घर में ये योग बनता है तो मंगलवार को हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएं।ॐ अंग अंगारकाय नमः कानियमित जाप करें।हनुमान चालीसा का पाठ करें। प्रत्येक मंगलवार को गाय को गुड़ खिलाएं।

10- दसवें भाव में अंगारक योग जिन लोगों की कुंडली में होता है वो हनुमान  मूंगा रत्न धारण करें।ॐ अंग अंगारकाय नमः कानियमित जाप करें।हनुमान चालीसा का पाठ करें।

11- कुंडली के लाभ भाव यानि ग्यारहवें भाव में अंगारक योग होने पर मिट्टी के बर्तन में सिन्दूर रख कर, उसे घर में रखें।ॐ अंग अंगारकाय नमः कानियमित जाप करें।हनुमान चालीसा का पाठ करें।

12- बारहवें भाव में अंगारक योग होता है वह उज्जैन जाकर अंगारेश्वर मंदिर में भात पूजा कराएं, चांदी का हाथी गले में धारण करें, सात चक्र पावर ग्रिड के नीचे फोटो रखें।ॐ अंग अंगारकाय नमः कानियमित जाप करें।हनुमान चालीसा का पाठ करें। प्रत्येक मंगलवार को गाय को गुड़ खिलाएं।

यदि बहुत ज्यादा समस्या है तो तत्काल उज्जैन के अंगारेश्वर मंदिर में जाकर भात पूजा कराएं तथा प्रतिदिन अंगारक स्त्रोत का पाठ लाभदायक रहता है।

🛑 अंगारक स्तोत्र-

विनोयग- अस्य श्री अंगारकस्तोत्रस्य विरूपांगिरस ऋषिः अग्निर्देवता गायत्रीच्छंदः भौमप्रीत्यर्थं जपे विनोयगः।

स्तोत्रम्

अंगारकः शक्तिधरो लोहितांगो धरासुतः।

कुमारो मंगलो भौमो महाकायो धनप्रदः।।

ऋणहर्ता दृष्टिकर्ता रोगकृद्रोगनाशनः।

विघुत् प्रभो व्रणकरः कामदो धनह्रत् कुजः।।

सामगानप्रियो रक्तवस्त्रो रक्तायतेक्षणः।

लोहितो रक्तवर्णश्च सर्वकर्माविरोधकः।।

रक्तामाल्यधरो हेमकुण्डली ग्रहनायकः।

नामान्येतानि भौमस्य यः पठेत् सततं नरः।।

ऋणं तस्य हि दौर्भाग्यं दारिद्रयं च विनश्यति।

धनं प्राप्नोति विपुलं स्त्रियं चैव मनोरमाम्।।

वंशोघोतकरं पुत्रं लभते नाऽत्र संशयः।

योऽर्चयेदह्नि भौमस्य मंगलं बहुपुष्पकैः।।

सर्वा नश्यति पीडा च तस्य ग्रहकृता ध्रुवम्।।

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