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वास्तु दोष से बचने के लिए नीले रंग की बाल्टी का इस्तेमाल करें -मनीष साईं

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वास्तु दोष से बचने के लिए ब्लू कलर की बाल्टी का इस्तेमाल करें- मनीष साईं रेमेडियल वास्तु मैं स्नानघर में किस तरह की पार्टी का उपयोग करना चाहिए इसके बारे में भी बताया गया है। लोग विभिन्न तरीके कलर की बाल्टी इस्तेमाल करते हैं कुछ कलर की बाल्टी ऐसी होती है जिन से नुकसान हो सकता है। जैसे कि लाल कलर जोकि फायर एलिमेंट का कलर है यदि इस कलर की बाल्टी इस्तेमाल की जाती है तो घर में झगड़े हो सकते हैं। पर्पल कलर की बाल्टी यूज करने से धन वृद्धि नहीं होती है। सफेद कलर की बाल्टी यूज करने से प्रोजेक्ट डीले होते हैं। मेरे 25 वर्षों के वास्तु पर अनुभव और विभिन्न रिसर्च के माध्यम से यह पाया है कि हमेशा यह ध्यान रखना है कि ब्लू कलर की बाल्टी यूज करने से सुख समृद्धि तथा शांति प्राप्त होती है और वास्तु दोष भी दूर होता है।

बीमारी और क्लैश का कारण गलत स्थान पर लगा दर्पण तो नहीं -मनीष साईं

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बीमारी और क्लैश का कारण गलत स्थान पर लगा दर्पण तो नहीं -मनीष साईं  पूरे विश्व में दर्पण  (मिरर) में अपना चेहरा देख सजने सवरने का प्रचलन है व्यक्ति जब तक दर्पण (आईना) में अपना मुंह नहीं देख लेता उसे चैन नहीं मिलता। खासकर महिलाओं को तो बिल्कुल नहीं। लेकिन क्या आप जानते हैं दर्पण को गलत स्थान पर यदि लगा दिया जाए तो उसके क्या नकारात्मक परिणाम आते हैं। गलत स्थान पर लगा दर्पण क्लेश और बीमारियों का कारण बनता है। सही स्थान पर लगा दर्पण जीवन में उन्नति देता है तथा सकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को बढ़ाता है। अधिकतर लोग दर्पण को आईना भी कहते हैं ज्यादातर आईना शब्द प्रचलित होता है। तो चालिए आज  मैं आपको  बताऊंगा कि आईने को घर में किस दिशा में रखना चाहिए। आईने को भूलकर भी कभी दक्षिण दिशा में नहीं लगाना चाहिए।  यह दिशा यम की दिशा मानी जाती है। इस दिशा में आईना लगाने से नकारात्मक ऊर्जा फैलती है तथा वस्तुओं को खराब करती है। इससे घर में क्लेश  रहता है और घर के लोगो का तबियत भी ठीक नही  रहती है। अखिर आईने के लिए कौन सी जगह एक दम ठीक रहती है। बता दें आईने को हमेशा...

घर में झगड़ों का कारण है अव्यवस्थित तरीके से रखें जूते-चप्पल- मनीष साईं

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घर में झगड़ों का कारण है अव्यवस्थित रखें जूते- चप्पल- मनीष साईं छोटी-छोटी बातें भी  जीवन में  दुख का स्थान बना लेती है। लाखों घरों का वास्तु करने के बाद कुछ अनुभव ऐसे भी रहे जिनमें घर का वास्तु तो बिल्कुल ठीक है लेकिन जूते-चप्पल रखने का तरीका अव्यवस्थित और वही घर में मानसिक तनाव एवं झगड़े का कारण था। आप सोचिए कि  एक छोटी सी  असावधानी  किस तरह विवाद का कारण बन गई। वास्तु शास्त्र में ऐसी बातें बताई गई है जिनके माध्यम से घरेलू समस्याओं का समाधान आसानी से कर सकते हैं। इसके लिए आपको कुछ वास्तु नियमों का पालन करना होगा। जिससे आपके घर में प्रवेश होने वाली नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी और आपके घर में सुख-शांति बनी रहेगी। ऐसे ही आज मैं आपको अपने घर में जूते चप्पल रखने का उचित स्थान बता रहा हूं की किस दिशा में जूते चप्पल रखना चाहिए । ▪ जूते-चप्पल हमेशा व्यवस्थित ढंग से उचित स्थान पर हमेशा पश्चिम की ओर ही रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार जो जूते चप्पल उपयोग के न हों उन्हें घर में ना रखें उन्हें किसी गरीब को देदें ।पुराने जूते चप्पल रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है ...

नजदीकियां बढ़ाने के लिए पति पत्नी को पलंग पर ऐसे सोना चाहिए- मनीष साईं

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नजदीकियां बढ़ाने के लिए पति पत्नी को पलंग पर ऐसे सोना चाहिए- मनीष साईं ▪ गलत दिशा में सोने का कारण पति पत्नी के बीच दूरियां तो नहीं। ▪ वास्तु अनुरूप पति पत्नी का बेडरूम कहां होना चाहिए जानिए। कभी आपने सोचा है की पलंग पर सोने  के भी अपने मायने हैं, अक्सर पति-पत्नी सोते समय बेपरवाह होकर सोते हैं। वह यह भी नहीं सोचते कि उनका गलत तरीके से सोना वैवाहिक जीवन में टकराव और तालमेल में कमी की वजह हो सकता है। रेमेडियल वास्तु कहता है, सोते समय अगर पति-पत्नी कुछ बातों का ध्यान रखें तो वैवाहिक जीवन की कई समस्याओं से बच सकते हैं, दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ सकती है। यहां तक कि संतान सुख में आने वाली बाधाओं को भी इससे कम किया जा सकता है। विश्व प्रसिद्ध वास्तु ज्योतिष एवं तंत्र गुरु मनीष साईं के अनुसार आइए जानते हैं पति पत्नी किस डायरेक्शन में सोए तथा उनका बेडरूम किस दिशा में होना चाहिए।  ▪पलंग पर सोने का सही तरीका- रेमेडियल वास्तु में  छोटी छोटी चीजों के बहुत मायने हैं जैसे कि वास्तु एवं शास्त्रों में कहा गया है कि दाम्पत्य जीवन में आपसी प्रेम और तालमेल के लिए पत्नी को...

नुकसान से बचने के लिए इस दिशा में बनवाएं टॉयलेट, होंगे फायदे -मनीष साईं

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नुकसान से बचने के लिए इस दिशा में बनवाएं टॉयलेट, होंगे फायदे -मनीष साईं     जीवन में  किसी ना किसी परेशानी के कारण  आप तनाव में  बने रहते हैं आपको यह नहीं मालूम होता है कि घर की बनावट का उसमें रहने वाले लोगों पर नाकारात्मक और साकारात्मक दोनों तरह का प्रभाव पड़ता है। खास तौर पर टॉयलेट का। टॉयलेट घर का वह हिस्सा है, जहां व्यक्ति सुबह उठने के बाद सबसे पहले जाता है। गलत दिशा में बनी टॉयलेट का भी लोगों के जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है। अगर आपके घर में हमेशा कोई न कोई बीमार रहता है, घर में लगातार झगड़े होते रहते हैं, मेहनत बहुत करते हैं लेकिन परिणाम नहीं मिलते, बच्चों को करियर में अवसर दिखते हैं लेकिन हाथ नहीं आते तो इसका कारण गलत दिशा में बना शौचालय भी हो सकता है। आज गुरुदेव श्री मनीष साईं जी आपको बताएगें कि वास्तु के हिसाब से किस दिशा में टॉयलेट नहीं बनाना चाहिए, और यदि गलत दिशा में बन गया है टॉयलेट तो वह कौन से उपाय हैं जिनसे हम जीवन को सुखमय बना सकते हैं तो आइए जानते हैं। ▪ रेमेडियल वास्तु के अनुसार टॉयलेट और बाथरूम को कभी भी एक साथ न बनवाए। इन दोनों को ए...

सुख-समृद्धि के आगमन के लिए घर के मुख्य द्वार पर बनाएं शुभ चिन्ह- मनीष साईं

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सुख-समृद्धि के आगमन के लिए घर के मुख्य द्वार पर बनाएं शुभ चिन्ह- मनीष साईं प्राचीन काल से  वैदिक शास्त्रों के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर शुभ धार्मिक चिन्ह बनाने की परंपरा है। ऐसा कहा जाता है कि माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने का  यह सबसे अच्छा माध्यम है,सुख-समृद्धि का आगमन होता है। आधुनिक युग और वास्तु शास्त्री इसे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने व नकारात्मक ऊर्जा को घर के बाहरी रखने का सबसे सफल प्रयोग मानते हैं। वास्तु के अनुसार कुछ ऐसे चिन्हों का उल्लेख किया गया है जो घर की सारी चिंताअों से मुक्ति दिलाने में सहायता करते हैं। घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक, ॐ, श्रीगणेश, शुभ-लाभ, दस दिगपाल, हनुमान जी की मूर्ति, कॉन्वेक्स मिरर, बागुआ मिरर आदि चिन्हों को बनाने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। ▪ घर में सदैव सुख-समृद्धि बनी रहे इसके लिए मुख्यद्वार पर स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं। इसके साथ शुभ-लाभ का चिह्न बनाना धनात्मक ऊर्जा का सूचक है। स्वस्तिक का चिह्न बनाने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है इसलिए प्रत्येक त्यौहार पर घर के मुख्यद्वार पर सिंदूर से शुभ-लाभ का चिन्ह बनाया जाता है।...

बीमारियों से मुक्ति पाने का सबसे सर्वशक्तिशाली मंत्र का जाप करें - मनीष साईं

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बीमारियों से मुक्ति पाने का सबसे सर्वशक्तिशाली मंत्र का जाप करें - मनीष साईं शास्त्रों में ऐसा कहा जाता है कि  जो व्यक्ति  धर्म समाज और वैदिक रीति रिवाजों से  अपना जीवन यापन करता है। उसके जीवन में  कष्ट नहीं रहते  कुछ विद्वान कहते हैं कि दुख और सुख  कर्मों का फल है  तो कुछ  विद्वान जन कहते हैं कि जिसने जीवन में आने वाली सुख और दुःख की परिस्थितियों का सामना करना सही ढ़ग से सीख लिया उसका मनुष्य जीवन ही सार्थक माना जाता है, और ऐसे व्यक्ति जो दुःख आने पर भी निराश नहीं हुए वे ही दुः ख के समाप्त होते ही सुख की परम अनुभूति का आंनद भी ले पाते है । रोग और शोक  यह कर्मों का फल है।बीमारी भी जीवन में एक अभिशाप के रूप में आती है और घर में दुखों का पहाड़ लाकर खड़ा कर देती है, बीमार व्यक्ति स्वयं तो भयंकर कष्ट सहता है पर उसके परिवारजन भी मानसिक प्रताड़ना के साथ आर्थिक रूप से भी कमजोर होने लगता है, अच्छे स्वास्थ्य के अभाव में धनवान व्यक्ति भी खुद को असहाय महसूस करता है, अगर डॉक्टरों के हर प्रयास असफल हो गये हो तो, एक बार तंत्र शास्त्र के इस महाशक्तिशाली...