केमद्रुम योग पर विशेष लेख
🔸🔸केमद्रुम योग पर विशेष लेख-
🚩🚩गरीबी और धन की समस्या का कारण आपकी कुंडली में केमद्रुम योग तो नहीं -मनीष साईं
व्यक्ति बहुत मेहनत करता है, लेकिन उसकी मेहनत का उसको सही परिणाम नहीं मिलता है। हमेशा वह गरीबी में रहता है उसका कारण कुंडली मै केमद्रुम योग बनता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली में बनने वाले विभिन्न प्रकार के अशुभ योगों में से केमद्रुम योग को बहुत अशुभ माना जाता है। केमद्रुम योग की प्रचलित परिभाषा के अनुसार किसी कुंडली में यदि किसी कुंडली में चन्द्रमा के अगले और पिछले दोनों ही घरों में कोई ग्रह न हो तो ऐसी कुंडली में केमद्रुम योग बन जाता है जिसके कारण जातक को निर्धनता अथवा अति निर्धनता, विभिन्न प्रकार के रोगों, मुसीबतों, व्यवसायिक तथा वैवाहिक जीवन में भीषण कठिनाईयों आदि का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र पर वर्षों तक रिसर्च करने के बाद मेरा मानना हैं कि केमद्रुम योग से पीड़ित जातक बहुत दयनीय जीवन व्यतीत करते हैं तथा इनमें से अनेक जातक अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कठिनाईयों तथा असफलतओं का सामना करते हैं तथा इन जातकों के जीवन का कोई एक क्षेत्र तो इस अशुभ योग के प्रभाव के कारण बिल्कुल ही नष्ट हो जाता है जैसे कि इस दोष से पीड़ित कुछ जातकों का जीवन भर विवाह नहीं हो पाता, कुछ जातकों को जीवन भर व्यवसाय ही नहीं मिल पाता तथा कुछ जातक जीवन भर निर्धन ही रहते हैं। कुछ ज्योतिषी यह मानते हैं कि केमद्रुम योग के प्रबल अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को लंबे समय के लिए कारावास अथवा जेल में रहना पड़ सकता है तथा इस योग के प्रबल अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ अन्य जातकों को देष निकाला जैसे दण्ड भी दिये जा सकते हैं। केमद्रुम योग से पीड़ित जातकों का सामाजिक स्तर सदा सामान्य से नीचे अथवा बहुत नीचे रहता है तथा इन्हें जीवन भर समाज में सम्मान तथा प्रतिष्ठा नहीं मिल पाती।
केमद्रुम योग के अशुभ प्रभावों को दूर करने हेतु कुछ उपायों को करके इस योग के अशुभ प्रभावों को कम करके शुभता को प्राप्त किया जा सकता है। सबसे पहले मैं आपको या योग कैसे बनता है उसके बारे में बताऊंगा और उसके बाद उपायों के बारे में आप ध्यान से पढ़ें।यदि आपको समझ में नहीं आए तो आप साईं अन्नपूर्णा सोशल फाउंडेशन के WhatsApp नंबर पर अपना कुंडली का डिटेल भेज सकते हैं और इस योग के बारे में जान सकते हैं।
🔸🔸केमद्रुम भंग योग की महत्वपूर्ण स्थितियां निम्नलिखित हैं-
🔹चंद्रमा केंद्र में स्वराशिस्थ या उच्च राशिस्थ होकर शुभ स्थिति में हो।
🔹लग्नेश बुध या गुरु से दृष्ट होकर शुभ स्थिति में हो।
🔹चंद्र और गुरु के मध्य भाव परिवर्तन का संबंध बन रहा हो।
🔹चंद्र अधिष्ठित राशि का स्वामी चंद्र पर दृष्टि डाल रहा हो।
🔹चंद्र अधिष्ठित राशि का स्वामी लग्न में स्थित हो।
🔹चंद्र अधिष्ठित राशि का स्वामी गुरु से दृष्ट हो।
🔹चंद्र अधिष्ठित राशि का स्वामी चंद्र से भाव परिवर्तन का संबंध बना रहा हो।
🔹चंद्र अधिष्ठित राशि का स्वामी लग्नेश, पंचमेश, सप्तमेश या नवमेश के साथ युति या दृष्टि संबंध बना रहा हो।
🔹लग्नेश, पंचमेश, सप्तमेश और नवमेश में से कम से कम किन्हीं दो भावेशों का आपस में युति या दृष्टि संबंध बन रहा हो।
🔹चंद्र पर बुध या गुरु की पूर्ण दृष्टि हो अथवा लग्न में बुध या गुरु की स्थिति या दृष्टि हो।
🔸🔸 दारिद्रय योग से मुक्ति के उपाय-
🔹 दारिद्र्य नाशक सात चक्र पावर ग्रिड के नीचे अपना फोटो रखें।
🔹सोमवार की पूर्णिमा के दिन या सोमवार को चित्रा नक्षत्र के टाइम से लगातार चार वर्ष तक पूर्णिमा का व्रत रखें।
🔹महामृत्युंजय मंत्र का जाप प्रतिदिन 108 बार अवश्य करें।
🔹 सोमवार के दिन शिवलिंग पर गाय का कच्चा दूध चढ़ाएं।सिद्ध कुंजिकास्तोत्रम का प्रतिदिन 11 बार तेज स्वर में पाठ करें।शिव तथा पार्वती की पूजा-उपासना करे।
🔹घर में दक्षिणावर्ती शंख स्थापित करें। इसके सम्मुख प्रतिदिन श्रीसूक्त का पाठ करें। दक्षिणावर्ती शंख के जल से मां लक्ष्मी की मूर्ति को स्नान कराएं।
🔹चांदी के श्रीयंत्र में मोती जड़वाकर लॉकेट धारण करें।
🔹रूद्राक्ष की माला से शिवपंचाक्षरी मंत्र “ॐ नम: शिवाय" का जप करने से केमद्रुम योग के अशुभ फल कम होते हैं।
🔹 सर्वतोभद्र यन्त्र को अपने घर के पूजा स्थान में स्थापित करें व उसके समक्ष इस मंत्र का नित्य 1 माला जाप करें।
" दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेष जन्तोः। स्वस्थै स्मृता मति मतीव शुभाम् ददासि । । दारिद्र्य दुःख भय हारिणि कात्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्र चित्तः"। ।
🔹घर में कनकधारा यन्त्र को स्थापित कर नित्य उसके आगे कनकधारा स्तोत्र का 3 बार पाठ करें। दाहिने हाथ की कनिष्टिका ऊँगली में सवा सात रत्ती का मोती रत्न चांदी की अंगूठी में शुक्ल पक्ष के सोमवार को धारण करें और पूर्णिमा का व्रत रखें।
(बहुत सारे उपाय मैंने आपको यह बताएं जो आपको सुलभ लगे वह करें)
🛑🛑 यदि आपके जीवन में किसी भी तरह की परेशानी है तो उसका कारण ज्योतिष, वास्तु एवं तंत्र संबंधी हो सकता है ।विश्व के जाने माने ज्योतिष वास्तु एवं तंत्र गुरु श्री मनीष साईं जी से आप परामर्श प्राप्त कर सकते हैं आप वास्तु की विजिट अपने शहर में करवा सकते हैं 20 लाख लोगों के जीवन में श्री मनीष साईं जी के परामर्श से परिवर्तन आया है।आप भी इस परिवर्तन का हिस्सा बन सकते हैं।
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साईं अन्नपूर्णा सोशल फाउंडेशन
156 सहयोग विहार शाहपुरा थाने के पास भोपाल मध्य प्रदेश
संपर्क -9617950498,9425150498
Whatsapp no.7000632297
www.gurumanishsai.com
🚩सबका भला हो सब सुख पाए🚩
🚩🚩गरीबी और धन की समस्या का कारण आपकी कुंडली में केमद्रुम योग तो नहीं -मनीष साईं
व्यक्ति बहुत मेहनत करता है, लेकिन उसकी मेहनत का उसको सही परिणाम नहीं मिलता है। हमेशा वह गरीबी में रहता है उसका कारण कुंडली मै केमद्रुम योग बनता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली में बनने वाले विभिन्न प्रकार के अशुभ योगों में से केमद्रुम योग को बहुत अशुभ माना जाता है। केमद्रुम योग की प्रचलित परिभाषा के अनुसार किसी कुंडली में यदि किसी कुंडली में चन्द्रमा के अगले और पिछले दोनों ही घरों में कोई ग्रह न हो तो ऐसी कुंडली में केमद्रुम योग बन जाता है जिसके कारण जातक को निर्धनता अथवा अति निर्धनता, विभिन्न प्रकार के रोगों, मुसीबतों, व्यवसायिक तथा वैवाहिक जीवन में भीषण कठिनाईयों आदि का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र पर वर्षों तक रिसर्च करने के बाद मेरा मानना हैं कि केमद्रुम योग से पीड़ित जातक बहुत दयनीय जीवन व्यतीत करते हैं तथा इनमें से अनेक जातक अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कठिनाईयों तथा असफलतओं का सामना करते हैं तथा इन जातकों के जीवन का कोई एक क्षेत्र तो इस अशुभ योग के प्रभाव के कारण बिल्कुल ही नष्ट हो जाता है जैसे कि इस दोष से पीड़ित कुछ जातकों का जीवन भर विवाह नहीं हो पाता, कुछ जातकों को जीवन भर व्यवसाय ही नहीं मिल पाता तथा कुछ जातक जीवन भर निर्धन ही रहते हैं। कुछ ज्योतिषी यह मानते हैं कि केमद्रुम योग के प्रबल अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को लंबे समय के लिए कारावास अथवा जेल में रहना पड़ सकता है तथा इस योग के प्रबल अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ अन्य जातकों को देष निकाला जैसे दण्ड भी दिये जा सकते हैं। केमद्रुम योग से पीड़ित जातकों का सामाजिक स्तर सदा सामान्य से नीचे अथवा बहुत नीचे रहता है तथा इन्हें जीवन भर समाज में सम्मान तथा प्रतिष्ठा नहीं मिल पाती।
केमद्रुम योग के अशुभ प्रभावों को दूर करने हेतु कुछ उपायों को करके इस योग के अशुभ प्रभावों को कम करके शुभता को प्राप्त किया जा सकता है। सबसे पहले मैं आपको या योग कैसे बनता है उसके बारे में बताऊंगा और उसके बाद उपायों के बारे में आप ध्यान से पढ़ें।यदि आपको समझ में नहीं आए तो आप साईं अन्नपूर्णा सोशल फाउंडेशन के WhatsApp नंबर पर अपना कुंडली का डिटेल भेज सकते हैं और इस योग के बारे में जान सकते हैं।
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🔹चंद्रमा केंद्र में स्वराशिस्थ या उच्च राशिस्थ होकर शुभ स्थिति में हो।
🔹लग्नेश बुध या गुरु से दृष्ट होकर शुभ स्थिति में हो।
🔹चंद्र और गुरु के मध्य भाव परिवर्तन का संबंध बन रहा हो।
🔹चंद्र अधिष्ठित राशि का स्वामी चंद्र पर दृष्टि डाल रहा हो।
🔹चंद्र अधिष्ठित राशि का स्वामी लग्न में स्थित हो।
🔹चंद्र अधिष्ठित राशि का स्वामी गुरु से दृष्ट हो।
🔹चंद्र अधिष्ठित राशि का स्वामी चंद्र से भाव परिवर्तन का संबंध बना रहा हो।
🔹चंद्र अधिष्ठित राशि का स्वामी लग्नेश, पंचमेश, सप्तमेश या नवमेश के साथ युति या दृष्टि संबंध बना रहा हो।
🔹लग्नेश, पंचमेश, सप्तमेश और नवमेश में से कम से कम किन्हीं दो भावेशों का आपस में युति या दृष्टि संबंध बन रहा हो।
🔹चंद्र पर बुध या गुरु की पूर्ण दृष्टि हो अथवा लग्न में बुध या गुरु की स्थिति या दृष्टि हो।
🔸🔸 दारिद्रय योग से मुक्ति के उपाय-
🔹 दारिद्र्य नाशक सात चक्र पावर ग्रिड के नीचे अपना फोटो रखें।
🔹सोमवार की पूर्णिमा के दिन या सोमवार को चित्रा नक्षत्र के टाइम से लगातार चार वर्ष तक पूर्णिमा का व्रत रखें।
🔹महामृत्युंजय मंत्र का जाप प्रतिदिन 108 बार अवश्य करें।
🔹 सोमवार के दिन शिवलिंग पर गाय का कच्चा दूध चढ़ाएं।सिद्ध कुंजिकास्तोत्रम का प्रतिदिन 11 बार तेज स्वर में पाठ करें।शिव तथा पार्वती की पूजा-उपासना करे।
🔹घर में दक्षिणावर्ती शंख स्थापित करें। इसके सम्मुख प्रतिदिन श्रीसूक्त का पाठ करें। दक्षिणावर्ती शंख के जल से मां लक्ष्मी की मूर्ति को स्नान कराएं।
🔹चांदी के श्रीयंत्र में मोती जड़वाकर लॉकेट धारण करें।
🔹रूद्राक्ष की माला से शिवपंचाक्षरी मंत्र “ॐ नम: शिवाय" का जप करने से केमद्रुम योग के अशुभ फल कम होते हैं।
🔹 सर्वतोभद्र यन्त्र को अपने घर के पूजा स्थान में स्थापित करें व उसके समक्ष इस मंत्र का नित्य 1 माला जाप करें।
" दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेष जन्तोः। स्वस्थै स्मृता मति मतीव शुभाम् ददासि । । दारिद्र्य दुःख भय हारिणि कात्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्र चित्तः"। ।
🔹घर में कनकधारा यन्त्र को स्थापित कर नित्य उसके आगे कनकधारा स्तोत्र का 3 बार पाठ करें। दाहिने हाथ की कनिष्टिका ऊँगली में सवा सात रत्ती का मोती रत्न चांदी की अंगूठी में शुक्ल पक्ष के सोमवार को धारण करें और पूर्णिमा का व्रत रखें।
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🚩सबका भला हो सब सुख पाए🚩
bahut sundar post aapne hr choti baat pr bahut achhe se prakas daala kemdrum yog ka upay bahut khash hain
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