अद्भुत चमत्कारी महाकाली उपासना- मनीष साई
ज्योतिष के महत्वपूर्ण उपाय -
रात्री के पहले पहर काले कपड़े पहन किए गए उपाय से होगा आपके जीवन में चमत्कार- मनीष साईं
दस महाविद्याओं में मां काली प्रथम स्थान पर हैं। देवी भागवतम के अनुसार काली ही समस्त विद्याओं की आदि हैं अर्थात् उनकी विद्यामय विभूतियां ही महा-विद्याएं हैं। बृहन्नील- तन्त्र अनुसार काली रक्त व कृष्ण-भेद से दो रुपों में अधिष्ठित हैं। कृष्णा वर्णा का नाम "दक्षिण काली" और रक्त-वर्णा का नाम "महा-सुंदरी" है।
कालिका-पुराण के अनुसार एक बार हिमालय पर अवस्थित मतंग मुनि के आश्रम में देवताओं ने महा-माया की स्तुति की। स्तुति से प्रसन्न होकर मतंग-वनिता के रुप में भगवती ने देवताओं को दर्शन दिया और पूछा कि तुम लोग किसकी स्तुति कर रहे हो। उसी समय देवी के शरीर से काले पहाड़ के समान वर्ण-वाली एक और दिव्य नारी का प्राकट्य हुआ। उस महा-तेजस्विनी ने स्वयं ही देवताओं की ओर से उत्तर दिया कि “ये लोग मेरा ही स्तवन कर रहे हैं ।”
वे काजल के समान कृष्णा थीं, इसीलिये उनका नाम “काली” पड़ा।
काली को काल की देवी कहा गया है। काल अर्थात समय उनके नियंत्रण में रहता हैं। देवी कालिका काम रुपणि हैं काली साधना के इच्छुक लोगों को साधना के साथ-साथ शक्ति चक्र पर त्राटक भी करना चाहिए।
शास्त्रों के अनुसार नवरात्री स्थापना पर काली ही प्रथम पूजनीय हैं। काली उपासना का सर्वश्रेष्ठ समय है रात्री का पहला पहर अर्थात शाम 07 से रात 09 बजे तक। इस साधना में काले कपड़े पहनें। सर्वप्रथम पूजा घर मे पश्चिममुखी होकर बैठ जाएं काला कपड़ा बिछाकर उस पर उड़द की ढेरी बनाएं। उड़द पर महाकाली यंत्र स्थापित करें। दाएं हाथ मे जल लेकर संकल्प करें तथा देवी का ध्यान करें।
ध्यान: मुंडमाला धारिणी दिगंबरा शत्रुसंघरिणी विचित्ररूपा।महादेवी कालमुख स्तंभिनी नमामितुभ्यम मात्रुस्वरूपा।।
महाकाली यंत्र का दशोपचार पूजन करें। काली यंत्र पर तेल का दीपक प्रज्वलित करें। लोहबान से धूप करें। नीले फूल चढ़ाएं। सिंदूर से तिलक करें। रेवड़ियों का भोग लगाएं। काजल, तिल, उड़द, नारियल व मेनफल चढ़ाएं। बाएं हाथ मे लौंग लेकर दाएं हाथ से काले हकीक माला से इस मंत्र का जाप करें।
मंत्र: क्लीं क्लीं क्रीं महाकाली काल सिद्धिं क्लीं क्लीं क्रीं फट स्वाहाः।।
जाप पूरा होने के बाद महाकाली से प्रार्थना करें फिर देखें कैसे आपका जीवन लेगा एक नया रूख और होंगे कैसे- कैसे चमत्कार जो देंगे आपके जीवन को एक नया मुकाम।
इसके अतिरिक्त काली साधना से बीमारी नाश, दुष्ट आत्मा दुष्ट ग्रह से बचाव होता है। अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है तथा निश्चित वाक सिद्धि प्रदान होती है। इसके हाथ में लिए हुए लौंग को मुहं मे रखकर चूसें अथवा अपने भोजन में मिला लें। हकीक की माला को 43 दिन तक गले मे धारण करे फिर इसे नदी में विसर्जित कर दें तथा यंत्र को पूजा स्थान में रख दें और बची हुई सामग्री का विसर्जन कर दें।
🔶🔶यह जितने भी उपाय आपको यहां प्रेषित किए जाते हैं यह सभी शास्त्रोक्त है। प्राचीनकाल में इन्हीं उपायों के माध्यम से लोग अपना जीवन यापन करते थे। तंत्र विज्ञान को इस आधुनिक युग में अंधविश्वास कहा जाता है, लेकिन यह छोटे-छोटे उपाय जिन्हें हजारों लाखों लोगों पर आजमाने के बाद आपको प्रेषित किए जाते हैं ।जिनके परिणाम सार्थक होते हैं । हमारे संस्थान द्वारा जो भी उपाय भेजे जाते हैं यह प्रयास होता है कि आपके जीवन में परिवर्तन हो।
🔶🔶🔶हमारा पता है
साईं अन्नपूर्णा सोशल फाउंडेशन
156 सहयोग विहार शाहपुरा थाने के पास बावड़िया कलां भोपाल
संपर्क -9617950498
WhatsApp नंबर-07000632297
www.manishsai.org
🚩🚩सबका भला हो सब सुख पाए🚩🚩
रात्री के पहले पहर काले कपड़े पहन किए गए उपाय से होगा आपके जीवन में चमत्कार- मनीष साईं
दस महाविद्याओं में मां काली प्रथम स्थान पर हैं। देवी भागवतम के अनुसार काली ही समस्त विद्याओं की आदि हैं अर्थात् उनकी विद्यामय विभूतियां ही महा-विद्याएं हैं। बृहन्नील- तन्त्र अनुसार काली रक्त व कृष्ण-भेद से दो रुपों में अधिष्ठित हैं। कृष्णा वर्णा का नाम "दक्षिण काली" और रक्त-वर्णा का नाम "महा-सुंदरी" है।
कालिका-पुराण के अनुसार एक बार हिमालय पर अवस्थित मतंग मुनि के आश्रम में देवताओं ने महा-माया की स्तुति की। स्तुति से प्रसन्न होकर मतंग-वनिता के रुप में भगवती ने देवताओं को दर्शन दिया और पूछा कि तुम लोग किसकी स्तुति कर रहे हो। उसी समय देवी के शरीर से काले पहाड़ के समान वर्ण-वाली एक और दिव्य नारी का प्राकट्य हुआ। उस महा-तेजस्विनी ने स्वयं ही देवताओं की ओर से उत्तर दिया कि “ये लोग मेरा ही स्तवन कर रहे हैं ।”
वे काजल के समान कृष्णा थीं, इसीलिये उनका नाम “काली” पड़ा।
काली को काल की देवी कहा गया है। काल अर्थात समय उनके नियंत्रण में रहता हैं। देवी कालिका काम रुपणि हैं काली साधना के इच्छुक लोगों को साधना के साथ-साथ शक्ति चक्र पर त्राटक भी करना चाहिए।
शास्त्रों के अनुसार नवरात्री स्थापना पर काली ही प्रथम पूजनीय हैं। काली उपासना का सर्वश्रेष्ठ समय है रात्री का पहला पहर अर्थात शाम 07 से रात 09 बजे तक। इस साधना में काले कपड़े पहनें। सर्वप्रथम पूजा घर मे पश्चिममुखी होकर बैठ जाएं काला कपड़ा बिछाकर उस पर उड़द की ढेरी बनाएं। उड़द पर महाकाली यंत्र स्थापित करें। दाएं हाथ मे जल लेकर संकल्प करें तथा देवी का ध्यान करें।
ध्यान: मुंडमाला धारिणी दिगंबरा शत्रुसंघरिणी विचित्ररूपा।महादेवी कालमुख स्तंभिनी नमामितुभ्यम मात्रुस्वरूपा।।
महाकाली यंत्र का दशोपचार पूजन करें। काली यंत्र पर तेल का दीपक प्रज्वलित करें। लोहबान से धूप करें। नीले फूल चढ़ाएं। सिंदूर से तिलक करें। रेवड़ियों का भोग लगाएं। काजल, तिल, उड़द, नारियल व मेनफल चढ़ाएं। बाएं हाथ मे लौंग लेकर दाएं हाथ से काले हकीक माला से इस मंत्र का जाप करें।
मंत्र: क्लीं क्लीं क्रीं महाकाली काल सिद्धिं क्लीं क्लीं क्रीं फट स्वाहाः।।
जाप पूरा होने के बाद महाकाली से प्रार्थना करें फिर देखें कैसे आपका जीवन लेगा एक नया रूख और होंगे कैसे- कैसे चमत्कार जो देंगे आपके जीवन को एक नया मुकाम।
इसके अतिरिक्त काली साधना से बीमारी नाश, दुष्ट आत्मा दुष्ट ग्रह से बचाव होता है। अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है तथा निश्चित वाक सिद्धि प्रदान होती है। इसके हाथ में लिए हुए लौंग को मुहं मे रखकर चूसें अथवा अपने भोजन में मिला लें। हकीक की माला को 43 दिन तक गले मे धारण करे फिर इसे नदी में विसर्जित कर दें तथा यंत्र को पूजा स्थान में रख दें और बची हुई सामग्री का विसर्जन कर दें।
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