परिवार के सदस्यों में असाध्य रोगों का दौर बना रहता है इन दोषों के कारण

✨✨आध्यात्मिक गुरु श्री मनीष साईं जी के अनुसार ✨✨

🚩🚩परिवार के सदस्यों में असाध्य रोगों का दौर बना रहता है इन दोषों के कारण🚩🚩

हमारे मानव शरीर में वायुतत्व पांच रूपों में कार्यरत हैं जो इस प्रकार हैं- व्यान, समान, अपान, प्राण और उदान। वायु ही शरीर रूपी वास्तु का आधार है। इनके सुचारू और संतुलित रहने से हमारा शरीर सही रूप में कार्य करता है। जैसे ही वायु का संतुलन बिगड़ता है यह दोष शारीरिक क्रियाओं को प्रभावित कर देता है।इसे वात या वायु कुपित होना भी कहते हैं। वायु के पांचों प्रकार में प्राण वायु के महत्व को सभी जानते हैं। जब तक प्राणवायु का सतत् आगमन जारी है तब तक यह काया रूपी इमारत भी सुंदर और स्वस्थ रहती है और जैसे ही प्राणवायु का प्रवाह बंद होता है वैसे ही इसकी सुंदरता नष्ट हो जाती है। इसी प्रकार किसी भी भवन में वायु तत्व का सही संतुलन होने पर वह उसे भवन के सभी दोषों से दूर रखता है। हमारे वास्तु एवं ज्योतिष विशेषज्ञों ने वायव्य दोष से मुख्य रूप से तीसरी संतान पर अधिक दुष्प्रभाव पडऩे की बात कही है। इसके अतिरिक्त जन्म लग्र कुंडली से इसका ग्रह स्थितियों से संबंध इस प्रकार भी जुड़ता है-

♦ यदि किसी जातक या जन्म लग्र कुंडली में कोई भी ग्रह पंचमेश होकर अस्त, पाप दृष्ट या पाप एवं क्रूर ग्रहों से युक्त हो और उस पर किसी भी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो।

♦घर के उत्तर पूर्व  टॉयलेट बना हो या कूड़ा करकट रखा हो तथा घर के बीचो-बीच ब्रम्ह स्थान में किचन या कोई भारी चीज रखी हो।

♦यहां शनि वेध हो या राहु स्थित हो, पंचम भाव में मंगल-शनि अथवा मंगल-राहु की युति हो तो संतान संबंधी दोष उत्पन्न करता है।

♦जहां जन्म लग्र कुंडली में नीच बुध, सूर्य, मंगल आदि हों और गुरु या शुक्र की दृष्टि न पड़ती हो, पंचमेश यदि नीच का होकर बैठा हो तो भी संतान संबंधी पीड़ा अवश्य रहती है।

♦ पंचम भाव पर शनि या राहु की दृष्टि हो। पंचम भाव के पीड़ित होने के ये कुछ मुख्य कारण हैं, जिनके फलस्वरूप संतान संबंधी दोष उत्पन्न होते हैं। जन्म लग्र कुंडली का वायव्य कोण वास्तु दोष युक्त हो तो संतान पक्ष प्रभावित होता है। वायव्य के दोष जनित होने पर वास्तु दोष के कारण परिवार के सदस्यों में असाध्य रोगों का दौर बना रहता है।

🔶उपाय : सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय परम पूज्य गुरुदेव श्री मनीष साईं जी द्वारा निर्मित साई अग्नि यज्ञ करने से सुख समृद्धि एवं शांति प्राप्त होती है  साथ ही वास्तु दोष निवारण तथा संतान संबंधी सर्वसमस्याओं का निदान संभव है।वास्तु संबंधी एवम ज्योतिष संबंधी किसी भी उपाय के लिए आप हमारे आश्रम पर संपर्क कर सकते हैं।
🔶हमारा पता है
साईं अन्नपूर्णा सोशल फाउंडेशन
156 सहयोग  विहार शाहपुरा थाने के सामने भोपाल मध्य प्रदेश
संपर्क 9617950498 WhatsApp नंबर 7000632297
 वेबसाइट www.manishsai.org
🚩🚩 सबका भला हो सब सुख पाए🚩🚩

Comments

Popular posts from this blog

तांत्रिक क्रिया के शिकार तो नहीं जाने, यदि ब्लैक मैजिक, वशीकरण, बंधन तथा मारण का प्रयोग आप पर हुआ है तो यह उपाय करें :मनीष साईं🚩🚩

अंगारक योग के उपाय

धन नहीं टिकता है, घर में क्लेश रहता है तो वास्तु के ये उपाय करें: मनीष साईं